तूफानी बारिश का कहर: खेतों में गिरी धान-गन्ने की फसल, हाईवे पर पेड़ गिरने से हादसा, किशोर की मौत
अयोध्या। अर्नब तूफान का असर रामनगरी अयोध्या में भी दिखाई दे रहा है। पिछले दो दिनों से जनपद में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी है। खराब मौसम के चलते जहां खेतों में खड़ी तैयार धान और गन्ने की फसल प्रभावित हुई है, वहीं कई स्थानों पर पेड़ और विद्युत पोल गिरने से आवागमन और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है।

तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में धान की तैयार फसल खेतों में गिर गई है। वहीं गन्ने की फसल भी तेज हवाओं की चपेट में आकर गिरने लगी है। फसल पकने के समय नुकसान होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह खराब रहा तो फसल को और नुकसान हो सकता है। फसल गिरने से कटाई के साथ-साथ उपज प्रभावित होने की आशंका है।

उधर, तेज बारिश और आंधी के कारण बीकापुर कोतवाली क्षेत्र के बिलारी माफी के पास प्रयागराज हाईवे पर बड़ा जामुन का पेड़ गिर गया। इससे हाईवे पर करीब एक घंटे तक आवागमन बाधित रहा। सूचना मिलने के बाद प्रशासन की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पेड़ को हटवाया, जिसके बाद यातायात सुचारु हो सका।
थाना पूराकलंदर क्षेत्र के शिवदासपुर शुक्ल का पुरवा में भी तूफानी हवाओं के दौरान पेड़ की डाल टीन शेड के मकान पर गिर गई। हादसे में गृहस्वामी जमुना प्रसाद शुक्ला और उनकी पत्नी को चोटें आईं। परिवार के अन्य सदस्य बाल-बाल बच गए।
सबसे गंभीर हादसा थाना पूराकलंदर क्षेत्र के मसौधा बाजार में प्रयागराज हाईवे पर हुआ। तेज आंधी के दौरान भारी-भरकम बरगद का पेड़ एक कार के ऊपर गिर गया। हादसे में कार में मौजूद किशोर आकाश वर्मा की मौत हो गई, जबकि एक अन्य किशोर घायल हो गया। घायल को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बताया गया कि दोनों किशोर शिवदासपुर शुक्ल का पुरवा के रहने वाले थे। उनके बड़े भाई पंकज शुक्ला कार से सामान खरीदने मसौधा बाजार गए थे। हादसे के समय पंकज कार से बाहर निकलकर सामान ले रहे थे, जिससे वह पेड़ गिरने की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए।
लगातार तेज हवाओं और बारिश के कारण जनपद में कई जगह पेड़ और विद्युत पोल गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। मौसम की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें प्रभावित स्थानों पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। किसानों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता खेतों में खड़ी तैयार फसल को बचाने और संभावित नुकसान को कम करना है।

